देर तक सोना, देर से सोना, देर से खाना रोगों को बुलाएगा !

मन खुश रहे और शरीर सेहतमंद, इसके लिए दिनचर्या को नियमित करना  जरुरी होगा ….

१) रात खाना कब खाते हैं और कितने बजे सोते हैं?

२) सुबह कब उठते हैं और पहला निवाला मुंह में कितने बजे डालते हैं?

३) हफ्ते में कितने दिन व्यायाम करते हैं या वॉकिंग करते हैं?

इन सवालों के उत्तर आपकी सेहत से जुड़े सवालों के जवाब काफी हद तक दे सकते हैं
क्यों है यह अहम्?

देर तक सोना, देर से सोना, देर से खाना रोगों को बुलाएगा !
देर तक सोना, देर से सोना, देर से खाना रोगों को बुलाएगा !

यह तथ्य समझ लीजिए : आप जितने बजे खाना खाएंगे, उसके दो – तीन घंटे बाद आपके शरीर में ग्लूकोज का स्तर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचेगा. उसे नियंत्रित करने के लिए इन्सुलिन का स्त्राव पैनक्रियाजद्वारा होगा, जो धीमे – धीमे ग्लूकोज के स्तर के कम करेगा. यानी रात ९ बजे खाना खाया, तो ११ -१२ बजे के बीच ग्लूकोज उच्चतम होकर, फिर इन्सुलिन से नियंत्रित होते हुए सुबह ३ – ४ बजे के बिच कम या  सामान्य स्तर पर आएगा. इस समय कुछ न खाया और ग्लूकोज की भरपाई नहीं की, तो बहुत सारी  समस्याए सिर उठाने लगेगी.

क्या होगा ? : इंसुलिन विरोधी हार्मोन ग्लूकोगोंन  हरकत में आ जाता है और लीवर में संचित गले कोजन को तोड़कर फिर शुगर बनाने लगता है, जो शरीर की कई तरह से नुकसान पहुंचाता है.
हो क्या रहा है : आजकल खाना ११ के बाद होता है, सोना १२ के बाद यानी ग्लूकोज पिक लेवल पर आता है ३ बजे तक और इंसुलिन के नियंत्रण के बाद कम  होते – होते सुबह ८ -९ बज जाते हैं.
दे से सोये इंसान को भूख लगती  रहती हैं . वह नींद पूरी करने के चक्कर में दस बजे तक सोया रहता है. पैनक्रियाज  इंसुलिन स्त्रावित कर – करके, शुगर संतुलित करके थकने लगता है . नतीजतन , ग्लूकोज काम हो जाता है.

क्या सही है : रात का भोजन ८ -९ के बिच कर लें. दस – साढ़े दस तक सो जाएँ. सुबह ५ – ६ के बिच उठें और एक कप चाय या शहद -निम्बू  पानी या एक फल खाकर टहलने जाये. ७ -८ के बिच नाश्ता करें . सुबह का नाश्ता २० -३० % प्रोटीन, ५० -६० % कार्बोहायड्रेट और १० – १५ % फैट का हो. इसमें रेशे व् खनिज ( फल ) जरूर शामिल करें.

मधुमेह ही खतरा नहीं : सोने – जागने के नियमों में गड़बड़ी से फेफड़ों, पेट, लिवर और आँतों  सब पर बुरा प्रभाव पड़ता है. पैनक्रियाज ही नहीं, लिवर, फेफड़े भी सुस्त होने लगते हैं. लिहाजा भूख कम हो जाती है. जब खाली पेट एसिड से भरने लगता है और जलन के मारे भूख बहुत कम हो जाती है.

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